साबूदाना खिचड़ी क्या है?
साबूदाना खिचड़ी, भीगे हुए साबूदाने को मूंगफली, आलू और जीरा-हरी मिर्च के हल्के तड़के के साथ पकाकर बनाई जाती है। आखिर में इसमें एक बड़ा चम्मच देसी घी डाला जाता है। यह पेट के लिए हल्की होती है और नवरात्रि के व्रत के खाने में आसानी से शामिल हो जाती है। शायद इसीलिए साल के इस समय में बहुत से घरों में यह बनाई जाती है।
- तैयारी का समय: 10 मिनट
- साबूदाना भिगोने का समय: 4 घंटे
- पकाने का समय: 15 मिनट
- कितने लोगों के लिए: 2 लोग
- कितनी सर्विंग: 2 सर्विंग
साबूदाना खिचड़ी रेसिपी के लिए सामग्री
- 1 कप साबूदाना
- 1 कप पानी (भिगोने के लिए)
- 2 मध्यम आकार के आलू, उबले और टुकड़ों में कटे हुए
- ½ कप भुनी हुई मूंगफली, दरदरी कुटी हुई
- 1 छोटा चम्मच जीरा
- 1 हरी मिर्च, बारीक कटी हुई
- सेंधा नमक, स्वादानुसार
- 2 बड़े चम्मच देसी घी
- ताज़ा हरा धनिया, सजाने के लिए
- थोड़ा सा नींबू का रस
- ठंडा दही, परोसने के लिए
साबूदाना और पानी का अनुपात
हर कप साबूदाने के लिए एक कप पानी का इस्तेमाल करें, उससे ज़्यादा नहीं। इस अनुपात से साबूदाना चिपचिपा नहीं होता और न ही बीच से सख्त रहता है।
साबूदाना कैसे भिगोएं
साबूदाने को बहते पानी के नीचे दो-तीन बार तब तक धोएं जब तक पानी साफ न दिखने लगे। पानी निकाल दें, मापा हुआ पानी डालें, ढक दें और 4 से 6 घंटे या रात भर के लिए छोड़ दें। जब साबूदाने का दाना उंगलियों के बीच आसानी से दबकर चपटा हो जाए, तो समझें कि यह तैयार है।
साबूदाना खिचड़ी कैसे बनाएं
एक पैन में मध्यम आंच पर शुद्ध देसी घी गरम करें और उसमें जीरा डालें। जब जीरा चटकने लगे, तो हरी मिर्च डालें और कुछ सेकंड तक भूनें।
उबले हुए आलू के टुकड़े डालें और 2 से 3 मिनट तक हल्का सुनहरा होने तक पकाएं। फिर भीगा हुआ साबूदाना और कुटी हुई मूंगफली डालें और धीरे-धीरे मिलाएं ताकि साबूदाने के दाने टूटें नहीं।
सेंधा नमक छिड़कें। इसे धीमी से मध्यम आंच पर 5 से 7 मिनट तक पकने दें। धीरे-धीरे चलाते रहें, जब तक कि साबूदाना नरम और थोड़ा पारदर्शी न हो जाए।
आंच बंद कर दें, थोड़ा नींबू का रस डालें और ऊपर से हरा धनिया डालकर सजाएं। इसे गरमा-गरम परोसें और साथ में एक कटोरी ठंडा दही रखें।
कैलोरी और फायदे
नवरात्रि के लिए आलू और मूंगफली से बनी साबूदाना खिचड़ी की एक आम प्लेट। इससे नैचुरल कार्ब्स और हेल्दी फैट्स से अच्छी और लगातार एनर्जी मिलती है। साबूदाना खिचड़ी में कैलोरी की बात करें, तो एक आम सर्विंग में 250 से 350 कैलोरी होती है, जो इस बात पर निर्भर करता है कि कितना घी और मूंगफली इस्तेमाल किया गया है। इसलिए साबूदाना खिचड़ी में कैलोरी असल में इस बात पर निर्भर करती है कि आप कितनी मात्रा में खा रहे हैं।
साबूदाना खिचड़ी के फायदों की बात करें तो, यह पेट भरने वाली होती है लेकिन भारीपन महसूस नहीं कराती, दिन भर लगातार एनर्जी देती है और पाचन के लिए हल्की होती है। यही वजह है कि यह व्रत के दौरान खाने के लिए बहुत अच्छी है। अगर आप सोच रहे हैं कि क्या साबूदाना खिचड़ी हेल्दी है, तो इसका जवाब आम तौर पर 'हां' है। खासकर तब, जब इसे अच्छे देसी घी से बनाया जाए और दही के साथ सही मात्रा में खाया जाए।
घी से क्यों आता है फ़र्क
इतनी आसान डिश का स्वाद काफी हद तक उसमें इस्तेमाल होने वाली चीज़ों की क्वालिटी पर निर्भर करता है। मधुसूदन देसी घी एक बढ़िया, पारंपरिक स्वाद देता है जिसका मुकाबला तेल नहीं कर सकता और इसी से खिचड़ी में वह गर्माहट भरी, जानी-पहचानी खुशबू आती है। एक चम्मच अच्छा घी और साथ में ठंडा दही, पूरी प्लेट को एक कम्प्लीट एहसास देते हैं।
और रेसिपीज़
पनीर स्टफ्ड कुट्टू चीला रेसिपी और मखाना खीर रेसिपी
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
क्या मैं आलू नहीं डालूं?
हां, यह आपकी मर्ज़ी पर है। सिर्फ़ मूंगफली, साबूदाना और घी-जीरे के अच्छे तड़के के साथ भी खिचड़ी का स्वाद बढ़िया लगता है।
मेरी खिचड़ी चिपचिपी या हलवे जैसी क्यों हो जाती है?
आम तौर पर ऐसा भिगोते समय बहुत ज़्यादा पानी इस्तेमाल करने या तेज़ आंच पर पकाने से होता है। पानी का सही अनुपात (जितना साबूदाना, उतना ही पानी) रखने और धीमी से मध्यम आंच पर पकाने से इससे बचा जा सकता है।
क्या मैं घी की जगह तेल इस्तेमाल कर सकता हूं?
आप कर सकते हैं, लेकिन स्वाद काफी अलग होगा। मधुसूदन देसी घी इस डिश को पारंपरिक स्वाद देता है, जो तेल से नहीं मिल सकता।
साबूदाना खिचड़ी के साथ क्या परोसें?
ठंडा दही इसके साथ सबसे अच्छा लगता है, क्योंकि इसकी ठंडक घी के भारीपन को बहुत अच्छे से बैलेंस करती है।