राजगिरा पनीर पराठा रेसिपी

राजगिरा पनीर पराठा रेसिपी

व्रत के दिनों में ऐसा खाना चाहिए जिससे पेट भरा रहे। राजगिरा पनीर पराठा रेसिपी बिल्कुल यही करती है। यह पराठा राजगिरा आटे (अमरैंथ आटा) से बनता है और इसमें नरम पनीर की स्टफिंग होती है। यह हेल्दी, स्वादिष्ट और बनाने में आसान है। यह नवरात्रि के लिए भी एकदम सही है। यह नवरात्रि के व्रत वाले खाने के प्लान में आसानी से शामिल हो जाता है।

तैयारी का समय: 15 मिनट

पकाने का समय: 20 मिनट

कितने पराठे बनेंगे: 4

राजगिरा पनीर पराठा के लिए सामग्री

आटे के लिए

  • 1 कप राजगिरा आटा (अमरैंथ आटा)
  • 1 उबला हुआ आलू, मैश किया हुआ
  • सेंधा नमक, ज़रूरत के अनुसार
  • गुनगुना पानी, ज़रूरत के अनुसार
  • 1 छोटा चम्मच देसी घी

पनीर की स्टफिंग के लिए

  • 150 ग्राम मधुसूदन पनीर, हाथों से तोड़ा हुआ (क्रम्बल किया हुआ)
  • 1 हरी मिर्च, बारीक कटी हुई
  • ½ छोटा चम्मच भुना जीरा पाउडर
  • 1 बड़ा चम्मच कटा हुआ हरा धनिया
  • सेंधा नमक, ज़रूरत के अनुसार

पकाने के लिए

  • 2 से 3 बड़े चम्मच मधुसूदन देसी घी

व्रत के नियम हर घर में अलग-अलग होते हैं। वही चीज़ें इस्तेमाल करें जिन्हें आपका परिवार मानता है।

पनीर भरी राजगिरा पराठा कैसे बनाएं

स्टेप 1: आटा तैयार करें - एक कटोरे में राजगिरा आटा, मैश किया हुआ आलू, सेंधा नमक और घी मिलाएं।

थोड़ा-थोड़ा करके गुनगुना पानी डालें। नरम आटा गूंथ लें। राजगिरा में ग्लूटेन नहीं होता है, इसलिए आलू इसे एक साथ बांधे रखने में मदद करता है।

स्टेप 2: आटे को आराम दें - आटे को 10 मिनट के लिए ढककर रख दें।

स्टेप 3: स्टफिंग तैयार करें - तोड़े हुए पनीर, हरी मिर्च, जीरा पाउडर, हरा धनिया और सेंधा नमक को मिलाएं। इसे सूखा रखें। गीली स्टफिंग से पराठा फट सकता है।

स्टेप 4: स्टफिंग भरें - नींबू के आकार का आटे का गोला लें। इसे अपनी हथेली पर चपटा करें। बीच में एक चम्मच स्टफिंग रखें। किनारों को एक साथ लाएं और अच्छी तरह सील कर दें।

स्टेप 5: धीरे-धीरे बेलें - गोले को घी लगी सतह पर रखें। दबाएं और धीरे-धीरे बेलें। स्टेप 6: पकाएं - मध्यम आंच पर तवा गरम करें। पराठा रखें और एक मिनट तक पकाएं। इसे पलट दें। दोनों तरफ थोड़ा मधुसूदन देसी घी लगाएं। सुनहरा रंग आने तक पकाएं।

स्टेप 7: परोसें - ठंडे दही के साथ गरमा-गरम परोसें।

नरम राजगिरा पराठे के लिए टिप्स

  • आटा गूंथने के लिए गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें।
  • बहुत ज़्यादा स्टफिंग न भरें।
  • मोटा बेलें, पतला नहीं। पतले राजगिरा पराठे टूट जाते हैं।
  • सिर्फ़ मध्यम आंच पर पकाएं।
  • घी से सबसे अच्छी खुशबू आती है। इसे न छोड़ें।

राजगिरा पनीर पराठा व्रत थाली

यह पराठा राजगिरा पनीर पराठा व्रत थाली में मुख्य डिश के तौर पर बहुत अच्छा लगता है। इसे इनके साथ परोसें:

  • एक कटोरी ठंडा दही
  • सेंधा नमक से बनी आलू की सब्ज़ी
  • थोड़े से फल
  • एक गिलास छाछ

यह एक पूरी थाली है और इससे पेट घंटों तक भरा रहता है।

नवरात्रि का खाना: यह क्यों सही है

हर साल यही सवाल उठता है। नवरात्रि के लिए अच्छा खाना क्या है? ऐसा खाना जो पेट भरे, आसान हो और व्रत में खाया जा सके। यह पराठा इन तीनों चीज़ों पर खरा उतरता है। यह नवरात्रि के व्रत वाले दिनों के लिए भी अच्छा है जब आपको एनर्जी चाहिए लेकिन कुछ हल्का खाना हो। नवरात्रि के 9 दिनों के खाने के लिए, आप हर दिन स्टफिंग बदल सकते हैं।

यह नवरात्रि स्पेशल रेसिपी घर पर नवरात्रि की डिशेज़ की लिस्ट का हिस्सा बन सकती है। आप हमारी पनीर स्टफ्ड कुट्टू चीला रेसिपी और मखाना खीर रेसिपी भी आज़मा सकते हैं। इस तरह की आसान नवरात्रि स्पेशल रेसिपी व्रत के खाने की टेंशन को कम करती है।

मधुसूदन पनीर और घी क्यों

इस पराठे में बस कुछ ही चीज़ें लगती हैं। इसलिए क्वालिटी मायने रखती है। ताज़ा पनीर नरम और ताज़ा होता है और इससे स्टफिंग क्रीमी बनती है। मधुसूदन देसी घी पराठे को एक गर्म, नटी (मेवे जैसी) खुशबू देता है। ये दोनों मिलकर साधारण राजगिरा पनीर पराठे का स्वाद खास बना देते हैं।

स्टोरेज

पराठे ताज़े और गर्म ही खाएं। अगर ज़रूरत हो, तो पके हुए पराठों को एक दिन के लिए फ्रिज में रख दें। इन्हें तवे पर थोड़ा घी डालकर गर्म कर लें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

क्या नवरात्रि के व्रत में राजगिरा खाया जा सकता है?

हाँ। व्रत के दौरान आमतौर पर राजगिरा खाया जाता है। अपने परिवार की परंपराओं और रीति-रिवाजों के अनुसार देख लें।

पराठा क्यों टूट जाता है?

आटा बहुत सूखा हो सकता है या स्टफिंग बहुत गीली हो सकती है। धीरे-धीरे गर्म पानी डालें और स्टफिंग को सूखा रखें।

क्या मैं इसे बिना आलू के बना सकती हूँ?

हाँ। थोड़ा और गर्म पानी डालें और अच्छी तरह गूंथ लें।

क्या मैं घी की जगह तेल का इस्तेमाल कर सकती हूँ?

नवरात्रि के दौरान, कुछ लोग तेल न खाने के नियमों का पालन करते हैं। आप अपनी मान्यताओं और रीति-रिवाजों के अनुसार नियमों को देख और मान सकती हैं।